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देश का हाल – सत्तर साल

आजादी के 70वें साल में हम सभी बधाई के पात्र हैं और इस दौरान कई सरकारें आईं और चली गईं, विकास भी हुआ लेकिन उन्हीं का विकास हुआ जो विकसित थे. आज भी हमारे यहाँ बच्चे अस्पतालों में ओक्सीजन के बिना दम तोड़ देते हैं. लोग अपने पीठ पर शवों को ढोते हैं. महिलाएं सड़कों पर या गाड़ियों में बच्चे को जन्म देने को मजबूर हैं. अस्पतालों में जानवर और मरीज दोनों साथ नजर आते हैं. इलाज के नाम पर डॉक्टर और नर्स से लेकर सफाई कर्मी तक अपने हैसियत के हिसाब से मरीजों का शोषण करते रहते हैं. सरकार मुफ्त जाँच और दवाइयों के दावा के नाम पर अस्पताल कर्मचारी, बिचौलिया, कंपनियों का धंधा बढ़ा रही है.

                                                                       -  संजय कु. सिंह

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अविष्कार है या विनाशकार

हिंदुस्तान (07 अक्टूबर, 2017) के अनुसार “वर्ल्ड इकनोमिक फोरम” में पेश आई.प्यू. के रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले पाँच वर्षों में विकसित देशों की 51 लाख नौकरियां रोबोट के कारण चली जाएंगी”. इसका असर विकसित देशों पर ही नहीं पड़ेगा बल्कि पुरे विश्व पर पड़ेगा, खासकर अविकसित एवं विकासशील राष्ट्रों पर. नव उदारवाद आर्थिक नीति के आने के बाद बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ सस्ते कुशल मजदूर के लिए विकासशील देशों पर निर्भर हैं. अतः वे ऑटोमेशन करके इन मजदूरों का छटनी करेंगी. इतना ही नहीं यदि विकसित देशों में नौकरियां जाएंगी तो बाजार प्रभावित होगा और इसका असर विकासशील देशों के निर्यात पर पड़ेगा. नतीजतन, विश्व-स्तर पर रोजगार का संकट गहराएगा.

                                                                       -  संजय कु. सिंह