प्रत्रिका के माध्यम से संवाद क्यों ?

आज के एक-ध्रुवीय दौर में मीडिया के परिदृश्य में बदलाव आया है l विभिन्न सूचना-प्रदाताओं द्वारा रोज़ कई तरह की सूचनाएँ प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, इन्टरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से हमें दी जा रही हैं l इससे व्यक्ति का दैनिक जीवन, समाज, संस्कृति और राज्य प्रभावित हुआ है l उत्पादन के साधन और बाज़ार भी प्रभावित हुए हैंl आम आदमी का जीवन वास्तविक परिस्थितियों की सच्चाई से दूर होती जा रही है l

मीडिया और सूचना-प्रदाताओं का मुख्य लक्ष्य या तो व्यवसायिक मुनाफा कमाना है या इनके ऊपर किसी ख़ास राजनीतिक संगठन, सरकार या व्यवसायिक घरानों का नियंत्रण हैl जिसके परिणामस्वरूप मुख्यधारा की मीडिया किसी घटना-विशेष को या लैंगिक समानता, मानवाधिकार, बराबरी के अधिकार, जन-संघर्षों को या तो तवज्जो नहीं देती या एक ख़ास दृष्टिकोण से दिखाने का प्रयास करती हैl

एक तरफ नए युग में शांति के लिए इंसानियत, बराबरी, न्याय और प्रगति के लिए संघर्ष चल रहा है वहीँ दूसरी तरफ अहितकारी राजनीति, परंपरा-संस्कृति-इतिहास को देश, काल और परिस्थिति को नजरअंदाज करते हुए द्वेषपूर्ण प्रस्तुति, जनतांत्रिक अधिकारों का हनन, बहुराष्ट्रीय व बड़े कंपनियों के हितों में काम करने का सिलसिला चल पड़ा है l नए मध्यम-वर्ग जिसमें विभिन्न समूहों के लोग शामिल हैं उसका एक हिस्सा भ्रमित हुआ है, इसलिए मध्यम-वर्ग का कई समूहों में विभाजन हुआ है l

इन परिस्थितियों से सामना करने के लिए केवल हौसला ही काफी नहीं है, बल्कि गंभीर संवाद अनिवार्य हैl इसके लिए ज्ञान हासिल कर हर समस्या, विषय, और अवधारणाओं की परिभाषा, विश्लेषण, समीक्षा और आलोचना करनी होगी l धर्म, परिवार, समाज और राज्य को चलाने के लिए ढांचा और नीति बनी हुयी है l इसके हरेक पहलू पर एक समग्र राजनीतिक नजरिया समय-समय पर विकसित करने की आवश्यकता है l इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक नयी पत्रिका के प्रकाशन का प्रयास चल रहा है l जिसके माध्यम से इसे पूरा करने की कोशिश की जाएगी l

एक पत्रिका के लिए कोशिश  (सामाजिक राजनितिक सूचना, चेतना व संवाद)

एक नयी पत्रिका की संभावना का प्रस्ताव लेकर हम आपके समक्ष उपस्थित हुए हैं l आज बाज़ार में कई तरह की सम-सामयिक पत्र-पत्रिकाएं कई स्वरूपों में उपलब्ध हैं l हम सभी कई स्तर पर मुख्यधारा की मीडिया की आलोचना करते रहे हैं l ऐसे में एक नयी पत्रिका की संभावना पर कई सवाल उठाना लाजिमी है जैसे -- नयी पत्रिका क्यों, किसके लिए, पत्रिका का स्वरुप कैसा हो, पत्रिका का नजरिया क्या हो, पत्रिका किन मुद्दों पर आधारित हो, कैसे और कौन प्रकाशित करे आदि-आदि l हिंदी प्रकाशन जगत में हम क्यों प्रवेश करना चाहते हैं? इससे पहले भी पत्र-पत्रिका के प्रकाशन को लेकर अलग-अलग समय में कई कोशिशें हुई हैं, उन सभी प्रयासों को भी ध्यान में रखा गया है l


ऐसे सभी सवालों को चिन्हित कर इस पुस्तिका में विचार व्यक्त किये गए हैं l प्रस्तावित पत्रिका को बेहतर बनाने के लिए आपके सुझाव, सहयोग, आलोचना की सतत आवश्यकता है l आपके विचार सादर आमंत्रित हैं l आशा है, आपकी भागीदारी से यह पत्रिका उपयोगी और अपने उद्देश्यों में सफल होगी 

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